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PRATYUSH Posts

Dr. Kalam Short Poem – A tribute

करोड़ों हाथ उठ जाते दुआओं मेंऔर कुछ ऐसा असर होता,
तुम जा न पाते छोड़ कर हमें देश जो न यूँ बेखबर होता।
जिसे दुनिया ने इतना चाहा,उसपर ख़ुदा का दिल भी आना ही था,
एक यही इल्तिज़ा थी मेरी,कि ऊपर वाले में थोड़ा सबर होता।

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